Important Attention
कभी भी मौके का इंतजार नहीं करना चाहिए।
क्योंकि जो आज है वो ही सबसे बड़ा मौका हैं।
गलत तरीकों से सफल होने से कई गुना बेहतर है,
सही तरीके अपनाकर असफ़ल हो जाना।
जिन्दगी का हर एक छोटा हिस्सा ही
हमारी जिदंगी की सफ़लता का बड़ा हिस्सा होता है।
कमजोर व्यक्ति तब रूक जाते हैं जब वो थक जाते हैं और आगे नहीं चल पाते,
लेकिन एक विजेता तभी रूकता है जब वो विजय हो जाता है।
आपकी जिन्दगी बहुत ही अनमोल और सुन्दर है,
इसे फालतू और बेकार बातों में नहीं गवाएं।
प्रेम एक ऐसी चीज है जो हारे हुए व्यक्ति को भी जीता देती है।
लेकिन घृणा एक पूरी तरह से सफ़ल हुए व्यक्ति को भी नीचे गिरा देती है।
जब आपको लोग पूछे कि आप क्या काम करते हैं तो वो लोग
वास्तव में आपको इतनी इज्जत देनी है, इसका अन्दाजा लगाते है।
किसी भी व्यक्ति को ये नहीं सोचना चाहिए कि वो अपनी जिन्दगी में कितना ख़ुश है,
बल्कि ये सोचना चाहिए कि उसकी वजह से कितने लोग ख़ुश है।
आपकी जिन्दगी का हर एक दिन अच्छा हो ये कोई जरूरी नहीं है,
लेकिन हर दिन हमेशा से बेहतर हो ये जरूरी है।
कोई भी काम हमें करने से पहले मुश्किल ही लगता है।
सफ़ल व्यक्ति अपने लिए हुए फ़ैसले से दुनिया बदलने की ताकत रखते हैं
और असफ़ल व्यक्ति दुनिया के दर से अपने ही फ़ैसले बदल देते हैं।**_
*अतिआवश्यक जानकारी सूचनार्थ*
👍👍👍👌*
*इम्यूनिटी सिस्टम....*
*कोई भी वायरस आपको मारना कभी भी नहीं चाहता। वो बस अपने लिए आपके शरीर में जगह बना कर रखना चाहता है।*
*कोरोना महामारी के बाद....!* *Lockdown व खुद को घर में कैद करके रखना, इस वायरस का सही इलाज नहीं है।*
*मार्च में जब खुद को कैद किया था, तो केवल गिने चुने केस ही थे।और आगे कुछ महीनों में हो सकता है कि आंकड़े लाखों में हो। घबराने से काम नहीं चलेगा, सतर्कता व समझदारी अब जरूरी है।*
*विज्ञान कहता है कि अगर किसी बच्चे को उसके जन्म से लेकर जवानी तक किसी ऐसी जगह रखा जाए, जहां उसे कभी जुकाम, खांसी, बुखार ना हो; तो एक समय बाद उसके शरीर को यदि जुकाम भी हो गया, तो उसकी सीधा मौत होगी। इसलिये इंसान को अपने शरीर को comfort zone में नहीं रखना चाहिए; अन्यथा वह उसका आदी हो जाता है।*
*सोचिए!*
*जिस जुकाम, खांसी को हम या हमारे बच्चे साल में 8-10 बार आराम से होने देते हैं, वो ही किसी की मौत का कारण भी बन सकता है।*
*तो घर में दुबक कर रहना एक टाइम तक तो सुरक्षित लग सकता है, लेकिन कल को यही वायरस आपके घर पर भी आ सकता है।*
*तो सही तरीका क्या है ?*
*सही तरीका है खुद के शरीर को, अपने परिवारजन को, अपने बच्चों को इसके लिए तैयार करना। आज नहीं तो कल हम सब को बाहर निकलना ही पड़ेगा। चाहे मजबूरी में ही सही।*
*तो आइए इस समय अपनी और अपने बच्चो के शरीर की इम्यून सिस्टम को मजबूत करें। अगर हम उनको सदा के लिए सुरक्षित रखना चाहते है तो!*
*कुछ सुझाव :*
*(१) 30 - 60 मिनट प्रतिदिन व्यायाम व योग का नियम बनाएं। उम्र कोई भी हो आपकी। खुद के लिए इतना तो कर ही सकते हो।*
*(२) खुद को और अपने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा शारीरिक मेहनत की आदत डाल लें। मशीनों की बजाय खुद के शरीर पर विश्वास रखें।*
*(३) पैदल चलना, साइकिल चलाना, सीढ़ी चढ़ने की आदत अब अच्छी आदत में शुमार हो गई है। कार, स्कूटर का लालच दूर रखें।*
*(४) धूप में सारे विटामिन और जीवन के लिए जरूरी तत्व हैं।*
*(५) प्रकृति से जुड़ाव करना होगा।*
*(६) गर्म पानी का सेवन करने की आदत डालें।*
*(७) जिन आंवला, अदरक, नीबू, गिलोय, फल, सलाद, अंकुरित अनाज, आयुर्वेदिक खाद्य जैसी कुदरती चीजों को हम पैक्ड व जंक फूड के चलते भूल गए थे; उनको ही अब अपने आहार में शामिल करना जरूरी है। आज सभी डॉक्टर व रिसर्च बोल रहे हैं कि इनका उपयोग करो।*
*(८) अपने जीवन में बैंक की किस्तों का बोझ जितना कम हो सके इतना अच्छा है। आवश्यकता असीमित ना हो। उस पर मंथन करना जरूरी है।*
*(९) घर छोटा होगा, कार छोटी होगी; लेकिन यकीन मानिये, मन में सुकून होगा व जीवन व्यवस्थित होगा।*
*(१०) जिन बच्चों और परिवार के लिए हम जो ये सब कर रहे हैं, वो भी हमारे साथ कम सुविधा में भी खुश हो, ये उनको समझाना होगा।*
*(११) संकट के समय के लिए कमाई का कुछ हिस्सा बचत का प्रावधान करना अब अत्यंत जरूरी होगा।*
*(१२) ज्यादा से ज्यादा सुविधा देने के चक्कर में हमने बच्चों का फायदा कम नुकसान ज्यादा कर दिया है।*
*याद कीजिए अपने वो दिन जब रोटी पर नमक-मिर्ची लगा कर खा जाते थे, और मस्त रहते थे।*
*बच्चों को सुरक्षित भविष्य देना सही है, परन्तु उनकी आदत में हद से ज्यादा सुविधा नहीं देनी है। खुद करके आगे बढ़ने की प्रेरणा देना जरूरी है। बच्चों की दैनिक दिनचर्या पर ध्यान देना होगा।*
*आज नहीं तो कल आप सब को घर से बाहर निकलना ही पड़ेगा। तो अपनी शरीर की प्रकृति के हिसाब से खुद के Immune system को मजबूत कीजिए।*
*खुद को शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत करना ही, सिर्फ इस वायरस से ही नहीं, बल्कि हर बीमारी से बचने का सही हल है।*
*कुल मिलाकर सार ये है कि बड़े बुजुर्ग जो कहा करते थे एवं किया करते थे; वे अपनी आवश्यकताओं को सीमित रखते थे, सीमित ख़र्च में जीवन यापन करते थे; चाहे पारिवारिक हो या सामाजिक, शारीरिक मेहनत करते थे, परिवार का महत्व समझते थे। उन सभी बातों को जीवन मे आत्मसात करना होगा और बच्चों को भी समझाना होगा।*
*जीवन जीने के तरीके में आमूलचूल परिवर्तन लाना ही पड़ेगा तभी जीवन आनंदित व सुकून देने वाला होगा।*
सभी परिवार के सदस्य कृपया *ध्यान दें*
1- कोई भी *खाली पेट* न रहे
2- *उपवास* न करें
3- रोज एक घंटे *धूप लें*
4- *AC का* प्रयोग न करें
5- *गरम* पानी पिएं, गले को *गीला* रखें
6- *सरसों* का तेल *नाक* में लगाएं
7- घर में कपूर वह गूगल *जलाएं*
आप *सुरक्षित* रहे । *घर* पर रहे i
8- आधा चम्मच *सोंठ* हर सब्जी में पकते हुए डालें..
9- रात को *दही* ना खायें
10- बच्चों को और खुद भी रात को एक एक कप *हल्दी* डाल कर दूध पिएं
11- हो सके तो एक चम्मच *चवनप्राश* खाएं
12- घर में कपूर और लौंग डाल कर *धूनी दें*
13- सुबह की चाय में एक *लौंग* डाल कर पिएं
14- फल में सिर्फ *संतरा* ज्यादा से ज्यादा खाएं
*15- आंवला किसी भी रूप में चाहे अचार , मुरब्बा,चूर्ण
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