प्रवासी भारतीय

          प्रवासी भारतीय

* जो लोग भारत छोड़कर दूसरे देशों में जाकर बसे हैं उन्हें प्रवासी भारतीय कहते हैं

* भारतीय सभ्यता, संस्कृति और संवृद्धि को विदेशों में रह रहे भरतीयों ने निरन्तर प्रचार-प्रसार किया है तथा अन्य देशों के लिए भी आकर्षण का विषय बनाया है

* अंग्रेजों के शासन के समय में ही हजारों भारतीय मजदूर अथवा अन्य उत्पादन कार्यो के लिए विदेशों में भेजे जाते थे

* विदेश गए भारतीय वहीं स्थायी रूप से रहने लगे उनकी कई पीढ़ियाँ वहीं गुजर-बसर कर रही हैं तथा साथ ही अपनी अस्मिता को बनाए हुए हैं ये भारतीय उन देशों की अर्थव्यवस्था के अभिन्न अंग बन चुके हैं

* ये भारतीय वहाँ की राजनीति तथा सरकार में भी प्रभावी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं

* इन भारतीय मूल के लोगों को अपने पूर्वजों की भूमि मिट्टी, गाँव, देश आदि से निरंतर लगाव बना हुआ है

* उपर्युक्त भारतीयों के अतिरिक्त विदेशों में रहने वाले बहुत सारे ऐसे भारतीय हैं जो उच्च शिक्षा के लिए वहाँ गए तथा वहीं बस गए वहीं के नागरिक बन गए

* इन प्रवासी भारतीयों में अधिकांश भारत वापस लौटने के इच्छुक हैं तथा वे यहाँ पुन: बसना चाहते हैं वे अपनी आगे की पीढ़ी को भी भारत की अस्मिता से परिचित करवाना चाहते हैं

* उनकी इच्छा है कि भारत में भी वे अपने देश की तरह रह सकें तथा जहाँ रह रहे हैं, वहाँ की भी उनकी नागरिकता बरकरार रहे

* लगभग सौ से भी अधिक देशों में रह रहे लराभग 2 करोड़ लोगों को अपने पूर्वजों की धरती अपनी ओर आकर्षित करती रही है वे अपने देश, गाँव के लिए कुछ ऐसा करना चाहते है कि वह यादगार बन जाए

* भारतीय सरकार ने उनकी इसी भावना को खूबसूरती से भारत की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए एक योजना बनायी है

* भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 9 जनवरी के दिन 'प्रवासी भारतीय दिवस' मनाया जाता है महात्मा गांधी इसी दिन सन् 1915 में दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापस आए थे

* प्रवासी भारतीयों को देश से जोड़ने का मकसद लेकर दिल्ली में 9 से 11 जनवरी 2003 के बीच पहला 'प्रवासी भारतीय दिवस' का आयोजन हुआ था इसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने की थी

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