कर्क रेखा

 🔵 कर्क रेखा विश्व के 18 देशों से होकर गुजरती है ✔️✔️


▪️मेक्सिको 

▪️अल्जीरिया

▪️माली

▪️मारीतिनिया

▪️ इजिप्ट ( मिस्त्र )

▪️नाइजर

▪️ मयांमार

▪️ सयुक्त अरब अमीरात 

▪️बहामास

▪️ताईबान

▪️ओमान

▪️ चाड

▪️ चीन

▪️ बांग्लादेश

▪️मोरक्को

▪️सऊदी अरब

▪️भारत

▪️ लीबिया 


🔘 ऊपर मैप में भी आप इन देशो की अवस्थिति को समझ सकते है जो पीले कलर से इंगित किया हुआ है  , कर्क  रेखा के बारे में और सारी जानकारी पहले दी जा चुकी है



🔘 मकर रेखा क्या है?


▪️मकर रेखा एक अक्षांश रेखा है जो कि दक्षिण गोलार्ध मे खीची हुयी काल्पनिक रेखा है। इस रेखा का निर्धारण यूनानी विद्वानो द्वारा किया गया था। दक्षिणी गोलार्द्ध  में भूमध्य रेखा‎ के समानान्तर 23 डिग्री 26′ 22″ पर, ग्लोब पर पश्चिम से पूरब की ओर खींची गई  काल्पनिक रेखा हैं।


▪️मकर रेखा दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और आस्ट्रेलिया महाद्वीपो से होकर गुजरती है।


▪️मकर रेखा दक्षिणी अमरीका के 4 देशो चिली, अर्जेन्टीना,ब्राजील और पराग्वे से होकर गुजरती है।


▪️मकर रेखा अफ्रीका के 5 देशो से होकर गुजरती है जो क्रमशः पश्चिम से पूर्व इस प्रकार है। नामीबिया, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, मोजाम्बिक।


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🟥प्रधान मध्याह्न रेखा क्या है 


◾️प्रधान मध्याह्न रेखा की स्थिति (लम्बवत) ग्रीनविच शहर में प्रधान मध्याह्न रेखा पृथ्वी पर 0° देशान्तर पर खींची गई मध्याह्न रेखा प्रधान मध्याह्न रेखा, प्रधान याम्योत्तर, या ग्रीनविच रेखा कहलाती है।


◾️दुनिया का मानक समय इसी रेखा से निर्धारित किया जाता हैं (कोरडिनेटिड युनिवर्सल टाइम -UTC)। लन्दन के एक शहर ग्रीनविच इसी रेखा पर स्थित हैं इसलिय इसे ग्रीनविच रेखा भी कहते है।


◾️शून्य डिग्री देशान्तर रेखा अन्टार्कटिका के अतिरिक्त जिन 8 देशों से गुजरती है वो देश 

 🔹- घाना 

 🔹- अल्जीरिया 

 🔹- टोगो 

 🔹- माली 

 🔹- इंग्लैंड 

 🔹- बर्किन्फासो 

 🔹- स्पेन 

 🔹- फ्रांस


🟥प्रधान मध्याह्न रेखा को मैप में रेड लाइन से दिखाया गया है ,साथ ही ऊपर के ग्लोब में भी तीर के निशान इंगित किया गया है


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अचानक तेज़ धूप से कम उजाले वाले इलाके में जाने पर अंधेरा क्यों लगता है ?

आँखों में आइरिस या आँख की पुतलियाँ वह भाग होता है जो प्रकाश के अनुरूप अपने आकार को बड़ा या छोटा कर सकती है।


जब हम ऐसे स्थान पर हों, जिधर प्रकाश हो, तो आइरिस सिकुड़ा हुआ अथवा छोटा होता है; किंतु जब हम अंधकार में जाते हैं, तब उसमें फैलाव/वृद्धि होती है। आइरिस के बड़े होने से, नेत्र में कम प्रकाश में भी, पहले की तुलना में अधिक रोशनी प्रवेश करती है, जिस कारण हमें अंधकार में भी थोड़ा-थोड़ा दिखाई देने लगता है।


किंतु आइरिस का अचानक से, बड़े से छोटा होना अथवा छोटे से बड़े होने में कुछ समय लगता है। तो जब हम तेज धूप से कम उजाले वाले क्षेत्र में जाते हैं, तो आइरिस अचानक से वृद्धि नहीं कर पाते, और हमें दिखाई नहीं देता है।


इसके ठीक विपरीत जब हम अंधकार वाले स्थान से अधिक प्रकाश वाले क्षेत्र में जाते हैं, तो आइरिस बड़े होने के कारण, बहुत अधिक प्रकाश आँखों में प्रवेश करता है, तथा हमें देखने में समस्या होती है, इसे क्षेत्रीय बोली में आँखें चौंधियाना कहते हैं।


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