सरस्वती पुरस्कार
*🔰सरस्वती_पुरस्कार.✅*
के. के. बिड़ला फाउन्डेशन द्वारा इसकी शुरूआत 1991 में की गई!
यह 8 वीं अनुसूची में वर्णित भाषाओं में से किसी में भी पिछले 10 वर्षों में प्रकाशित उत्कृष्ट कृति को दिया जाता है।
इसके तहत स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और 15 लाख रुपये प्रदान किया जाता है।
29वां_सरस्वती_सम्मान2019 " सिंधी" भाषा के लेखक "वासदेह_मोही" को उनकी रचना "चेकबुक" के लिए प्रदान किया गया।
28वां_सरस्वती_सम्मान2018 डॉ_के_शिवा_रेड्डी को उनकी रचना "पक्की_ओत्तिगिलिते" के लिए दिया गया था।
सरस्वती माता की वंदना
मैया हम पर उपकार करो
विद्या का दान हमें देकर
मैया हमरा उद्धार करो
माँ हमको भी बुद्धि दे दो
मन को हमारे शुद्धि दे दो
करती हो माँ काहे देरी
समझो मैया विपदा मेरी
सुन लो माता विनती हमारी
आ जाओ कर हंस सवारी
हम हैं माँ मूरख अज्ञानी
हम तो तुम्हरी पूजा न जानी
फिर भी हैं हम लाल आपके
विनती मेरी स्वीकार करो
माँ हर युग में सदा आपकी
जय जयकार हुई है
सारा ब्रह्मांड है माँ तुमसे
ए वेद पुराण सभी हैं
माँ तुम्हरे बिन ब्रह्म देव भी
भाग्य नहीं लिख पाते
बिना आपके कुम्भकर्ण को
निन्द्राशन कैसे दिलाते
माँ बसो मेरे अन्तर्मन में
मुझ में भी चमत्कार करो
हे वीणा वादिनी शारदे माँ
वीणा की तान सुना दीजै
उलझ गया संसार में हूँ
मुझमें मुस्कान माँ ला दीजै
हर रात चाँदनी हो मेरी
हर दिन को माँ त्यौहार करो
माँ है अथाह संसार का सागर
क्या खोया क्या मैंने पाकर
कृपा करो माँ अगर आप तो
हो जीवन धन्य धरा पर आकर
मानुष जनम मिला कृपा से
नहीं जाना है इसे व्यर्थ गँवा कर
माँ बीच भँवर में फँसी है नैया
हमरी नैया पार करो
वसंत पंचमी
बदला है वातावरण,
निकट शीत का अंत ।
शुक्ल पंचमी माघ की,
लाये साथ बसंत ।।
अनुपम मनमोहक छटा,
मनभावन अंदाज ।
हृदय प्रेम से लूटने,
आये हैं ऋतुराज ।।
धरती का सुन्दर खिला,
दुल्हन जैसा रूप ।
इस मौसम में देह को,
शीतल लगती धूप ।।
डाली डाली पेड़ की,
डाल नया परिधान ।
आकर्षित मन को करे,
फूलों की मुस्कान ।।
पीली साड़ी डालकर,
सरसों खेले फाग ।
मधुर मधुर आवाज में,
कोयल गाये राग ।।
गेहूँ की बाली मगन,
इठलाये अत्यंत ।
पुरवाई भी झूमकर,
गाये राग बसंत ।।
पर्व महाशिवरात्रि का,
पावन और विशेष ।
होली करे समाज से ,
दूर बुराई द्वेष ।।
अद्भुत दिखता पुष्प से,
भौरों का अनुराग ।
और सुगन्धित बौर से,
लदा आम का बाग़ ।।
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