⭕️ हिन्दी पर्यायवाची शब्द ⭕️
⭕️ हिन्दी पर्यायवाची शब्द ⭕️
🔷 जिन शब्दों के अर्थ में समानता होती है ,उन्हें समानार्थक या पर्यायवाची शब्द कहते है।
🔶 हिन्दी भाषा में एक शब्द के समान अर्थ वाले कई शब्द हमें मिल जाते है, जैसे -
• पहाड़ - पर्वत , अचल, भूधर .
• ये शब्द पर्यायवाची कहलाते है.इन शब्दों के अर्थ में समानता होती है,लेकिन प्रत्येक शब्द की अपनी विशेषता होती है.पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग करते हुए विशेष सावधानीबरतनी चाहिए । *⃣ कुछ पर्यायवाची शब्द यहाँ दिए जा रहे है -
आज का वर्ण हैं "अ"
• अंगूर : द्राक्षा , दाख , इंगुर।
• आम : आम्र ,रसाल ,कामशर।
• अंधकार : तिमिर , अँधेरा , तम।
• आग: अग्नि,अनल,पावक,दहन,ज्वलन,धूमकेतु,कृशानु।
• अच्छा : उचित,शोभन,उपयुक्त,शुभ,सौम्य।
• अजेय : अजित , अपराजित , अपराजेय।
• अतिथि : पाहून, आंगतुक ,अभ्यागत, मेहमान।
• अनुचर : नौकर , दास , सेवक , परिचारक।
• अनुपम :अनूठा , अनोखा , अपूर्व , निराला , अभूतपूर्व।
• अन्य : पृथक , और , भिन्न ,दूसरा।
• अनाज : शस्य , अन्न , धान्य।
• अरण्य : विपिन , वन , कानन , कान्तार , जंगल।
• आभूषण : विभूषण , भूषण ,गहना , अलंकार।
• आज्ञा : हुक्म , आदेश , निर्देश।
• अमृत : सुधा,अमिय,पियूष,सोम,मधु,अमी।
• असुर : दैत्य,दानव,राक्षस,निशाचर,रजनीचर,दनुज।
• अश्व : वाजि,घोडा,घोटक,रविपुत्र ,हय,तुरंग।
• आम : रसाल,आम्र,सौरभ,मादक,अमृतफल,सहुकार।
• अंहकार : गर्व,अभिमान,दर्प,मद,घमंड।
• आँख - लोचन, नयन, नेत्र, चक्षु, दृग, विलोचन, दृष्टि।
• आकाश - नभ,गगन,अम्बर,व्योम, अनन्त ,आसमान।
• आनंद - हर्ष,सुख,आमोद,मोद,प्रमोद,उल्लास।
• आश्रम - कुटी ,विहार,मठ,संघ,अखाडा।
◾️पर्यायवाची शब्द ◾️
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1. असुर – दनुज, निशाचर, राक्षस ,दैत्य ,दानव ,रजनीचर ,यातुधान
2. अमृत – पीयूष , सुधा ,अमिय ,सोम ,सुरभोग ,मधु
3. अर्जुन – धनंजय , पार्थ , भारत ,गांडीवधारी ,कौन्तेय ,गुडाकेश
4. अरण्य – जंगल ,वन ,कान्तार ,कानन ,विपिन
5. अंग – अंश ,भाग ,हिस्सा ,अवयव
6. आँख – नेत्र ,चक्षु ,लोचन ,दृग ,अक्षि ,विलोचन
7. आम्र – आम ,रसाल ,सहकार, अतिसौरभ ,पिकवल्लभ
8. आकाश – अम्बर ,गगन ,नभ , व्योम , शून्य ,अनन्त ,आसमान ,अन्तरिक्ष
9. अनी – सेना ,फौज ,चमू ,दल ,कटक
10. इच्छा – कामना ,चाह , आकांक्षा ,मनोरथ ,स्पृहा ,वांछा ,ईहा ,अभिलाषा
11. इन्द्र – सुरेश ,सुरेन्द्र ,सुरपति ,शचीपति ,देवेन्द्र ,देवेश ,वासव ,पुरन्दर
12. कमल – राजीव ,पुण्डरीक ,जलज ,पंकज ,सरोज ,सरोरुह ,नलिन ,तामरस ,कंज,अरविन्द, अम्बुज ,सरसिज 13. किरण – अंशु ,रश्मि ,कर ,मयूख , मरीचि ,प्रभा ,अर्चि
14. कपड़ा – वस्त्र ,पट ,चीर ,अम्बर ,वसन
15. कुबेर – धनद ,धनेश ,धनाधिप ,राजराज ,यक्षपति
16. कामदेव – मनसिज ,मनोज ,काम ,मन्मथ ,मार ,अनंग ,पुष्पधन्वा ,मदन ,कंदर्प , मकरध्वज ,रतिनाथ ,मीनकेतु 17. कृष्ण – गोविन्द ,गोपाल ,माधव ,कंसारि ,यशोदानन्दन ,देवकीपुत्र ,वासुदेव ,नन्दनन्दन , हरि ,श्याम ,मुरारि ,राधावल्लभ ,यदुराज ,कान्ह ,कन्हैया
18. कल्पवृक्ष – भंडार ,सुरतरु ,पारिजात ,कल्पद्रुम ,कल्पतरु
19. कोयल – पिक ,परभृत ,कोकिल ,वसंतदूती ,वसंतप्रिय
20. गणेश – लम्बोदर ,गजपति ,गणपति ,एकदन्त ,विनायक ,गजवदन ,मोदकप्रिय , मूषकवाहन ,भवानीनन्दन ,गौरीसुत , गजानन
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❇️ सर्वनाम नोट्स |
» सर्वनाम शब्द सर्व + नाम के योग से बना है यहाँ ‘सर्व’ का अर्थ होता है – ‘सभी’ एवं ‘नाम’ का अर्थ होता है – ‘संज्ञा’ अर्थात ऐसे शब्द जो सभी प्रकार के संज्ञा शब्दों के स्थान पर प्रयुक्त हो सकते है वे सर्वनाम शब्द कहलाते है। जैसे – मैं, तुम, आप, यह, क्या, कौन, कुछ आदि।
सर्वनाम शब्दों का प्रयोग भाषा की सुंदरता, सरलता एवं संक्षिप्तता के लिए किया जाता है, सर्वनाम के अभाव में वाक्य में बार-बार संज्ञाओं के प्रयोग से भाषा अटपटी लगती है।
◾️ सर्वनाम के भेद
सर्वनाम के मुख्यतः 6 भेद होते हैं –
(1) पुरुषवाचक सर्वनाम
» बोलने वाले, सुनने वाले या किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रयोग किये जाने वाले सर्वनाम शब्द। ये तीन प्रकार के होते है –
(i) उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम – वक्ता
एकवचन – मैं, मेरा, मेरी, मेरे, मैंने, मुझे
बहुवचन – हम, हमारा, हमारी, हमारे, हमने, हमसे
(ii) मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम – श्रोता
एकवचन/बहुवचन – तुम, तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हें, तुमसे
एकवचन – तु, तेरा, तेरी, तेरे, तुझे, तुझसे, तूने
आदरार्थक – आप, आपका, आपकी, आपके, अपने
(iii) अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम – वक्ता और श्रोता जिसके बारे में बात करते हैं।
एकवचन – यह, इसका, इसकी, इसके, इसने, वह, उसका, उसकी, उसमें, उसके
बहुवचन – ये, इनको, इनकी, इनके, वे, उनका, उनकी, उनके
अन्य शब्द – आप, आपका, आपकी, आपको, आपसे
(2) निश्चयवाचक सर्वनाम
» जिन सर्वनाम शब्दो से किसी व्यक्ति, प्राणी, घटना का बोध होता हो जैसे – यह, वह, वे, ये
(3) अनिश्चयवाचक सर्वनाम
» जिन सर्वनाम शब्दों से किसी निश्चित पदार्थ या व्यक्ति या घटना का ज्ञान नही होता ही जैसे – कोई, कुछ, किसी
(4) प्रश्नवाचक सर्वनाम
» जिन सर्वनामों से किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु आदि के सम्बंध में प्रश्न का बोध होता हो। जैसे – कौन, क्या, किसने, किसको, किसका, किसकी
(5) संबंधवाचक सर्वनाम
» वे सर्वनाम जो किसी उपवाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम का अन्य संज्ञा या सर्वनाम के साथ सम्बन्ध प्रकट करते है। (दो-दो योजक शब्द) जैसे – जो-सो/वह, जिसे-उसे, जिसने-उसमें, जहां-वहां।
(6) निजवाचक सर्वनाम
» वे सर्वनाम जिनका प्रयोग बोलने वाले द्वारा स्वयं अपने लिए किया जाता है। जैसे – स्वयं, खुद, स्वतः, अपना, अपनी, अपने |
2. यह/वह/ये/वे शब्दों में सही सर्वनाम पहचानना :-
(i) यदि इन शब्दों का प्रयोग किसी व्यक्ति के स्थान पर हो रहा है एवं उस व्यक्ति का उस वाक्य से उल्लेख नहीं हो तो वहां इनको अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम मानना चाहिए।
(ii) यदि इन शब्दों का प्रयोग किसी संबंधवाचक सर्वनाम के साथ हो रहा हो तो वहां इनको सहसंबंध वाचक सर्वनाम माना जाता है।
(iii) यदि इन शब्दों का प्रयोग किसी पदार्थ की ओर संकेत करने के लिए किया जा रहा हो परंतु वह संकेतिक पदार्थ इनके तुरंत बाद नहीं लिखा हुआ हो अथवा यही/वहीं/इन्हीं/उन्हीं जैसे शब्दों का प्रयोग किया हो तो वहां इन्हें निश्चयवाचक सर्वनाम में रखा जाता है।
(iv) यदि इन शब्दों का प्रयोग किसी पदार्थ की ओर संकेत करने के लिए किया जा रहा हो तो वहां इनको सार्वनामिक विशेषण शब्द माना जाता है।
जैसे – वह पुस्तक पढ़ रहा है (अन्य पुरुषवाचक)
वह पुस्तक बहुत अच्छी है (सार्वनामिक विशेष)
शिक्षक ने संकेत करके कहा वह लाना यह नहीं (निश्चयवाचक)
जो पढ़ेगा वह सफल होगा (सहसम्बन्ध वाचक)
» सर्वनाम शब्द सर्व + नाम के योग से बना है यहाँ ‘सर्व’ का अर्थ होता है – ‘सभी’ एवं ‘नाम’ का अर्थ होता है – ‘संज्ञा’ अर्थात ऐसे शब्द जो सभी प्रकार के संज्ञा शब्दों के स्थान पर प्रयुक्त हो सकते है वे सर्वनाम शब्द कहलाते है। जैसे – मैं, तुम, आप, यह, क्या, कौन, कुछ आदि।
सर्वनाम शब्दों का प्रयोग भाषा की सुंदरता, सरलता एवं संक्षिप्तता के लिए किया जाता है, सर्वनाम के अभाव में वाक्य में बार-बार संज्ञाओं के प्रयोग से भाषा अटपटी लगती है।
◾️ सर्वनाम के भेद
सर्वनाम के मुख्यतः 6 भेद होते हैं –
(1) पुरुषवाचक सर्वनाम
» बोलने वाले, सुनने वाले या किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रयोग किये जाने वाले सर्वनाम शब्द। ये तीन प्रकार के होते है –
(i) उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम – वक्ता
एकवचन – मैं, मेरा, मेरी, मेरे, मैंने, मुझे
बहुवचन – हम, हमारा, हमारी, हमारे, हमने, हमसे
(ii) मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम – श्रोता
एकवचन/बहुवचन – तुम, तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हें, तुमसे
एकवचन – तु, तेरा, तेरी, तेरे, तुझे, तुझसे, तूने
आदरार्थक – आप, आपका, आपकी, आपके, अपने
(iii) अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम – वक्ता और श्रोता जिसके बारे में बात करते हैं।
एकवचन – यह, इसका, इसकी, इसके, इसने, वह, उसका, उसकी, उसमें, उसके
बहुवचन – ये, इनको, इनकी, इनके, वे, उनका, उनकी, उनके
अन्य शब्द – आप, आपका, आपकी, आपको, आपसे
(2) निश्चयवाचक सर्वनाम
» जिन सर्वनाम शब्दो से किसी व्यक्ति, प्राणी, घटना का बोध होता हो जैसे – यह, वह, वे, ये
(3) अनिश्चयवाचक सर्वनाम
» जिन सर्वनाम शब्दों से किसी निश्चित पदार्थ या व्यक्ति या घटना का ज्ञान नही होता ही जैसे – कोई, कुछ, किसी
(4) प्रश्नवाचक सर्वनाम
» जिन सर्वनामों से किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु आदि के सम्बंध में प्रश्न का बोध होता हो। जैसे – कौन, क्या, किसने, किसको, किसका, किसकी
(5) संबंधवाचक सर्वनाम
» वे सर्वनाम जो किसी उपवाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम का अन्य संज्ञा या सर्वनाम के साथ सम्बन्ध प्रकट करते है। (दो-दो योजक शब्द) जैसे – जो-सो/वह, जिसे-उसे, जिसने-उसमें, जहां-वहां।
(6) निजवाचक सर्वनाम
» वे सर्वनाम जिनका प्रयोग बोलने वाले द्वारा स्वयं अपने लिए किया जाता है। जैसे – स्वयं, खुद, स्वतः, अपना, अपनी, अपने |
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🔲 वाक्य विचार 🔲
वाक्य की परिभाषा
शब्दों के सार्थक एवं व्यवस्थित समूह को वाक्य कहा जाता है
» प्रत्येक भाषा की एक अपनी निश्चित व्यवस्था होती है एवं उस व्यवस्था के अनुसार लिखा गया शब्दों का समूह वाक्य कहलाता है
» हिन्दी भाषा में सामान्यतः “कर्ता + कर्म + क्रिया” व्यवस्था को अपनाया गया |
जैसे :-👇
श्याम दूध पी रहा है।
मैं भागते-भागते थक गया।
यह कितना सुंदर उपवन है।
ओह ! आज तो गरमी के कारण प्राण निकले जा रहे हैं।
वह मेहनत करता तो पास हो जाता।
» ये सभी मुख से निकलने वाली सार्थक ध्वनियों के समूह हैं। अतः ये वाक्य हैं। वाक्य भाषा का चरम अवयव है।
वाक्य के अंग या अवयव
✅ एक वाक्य के प्रमुखतः दो अंग माने जाते है –
उद्देश्य।
विधेय।
1. उद्देश्य :- किसी भी वाक्य में प्रयुक्त कर्ता एवं कर्ता से संबंधित अन्य शब्दों को उद्येश्य भाग में शामिल किया जाता है।
✔️जैसे :-
अर्जुन ने जयद्रथ को मारा।
कुत्ता भौंक रहा है।
तोता डाल पर बैठा है।
इनमें अर्जुन ने, कुत्ता, तोता उद्देश्य हैं; इनके विषय में कुछ कहा गया है। अथवा यों कह सकते हैं कि वाक्य में जो कर्ता हो उसे उद्देश्य कह सकते हैं क्योंकि किसी क्रिया को करने के कारण वही मुख्य होता है।
2. विधेय :- उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाता है, अथवा उद्देश्य (कर्ता) जो कुछ कार्य करता है वह सब विधेय कहलाता है।
✔️जैसे :-
अर्जुन ने जयद्रथ को मारा।
कुत्ता भौंक रहा है।
तोता डाल पर बैठा है।
इनमें ‘जयद्रथ को मारा’, ‘भौंक रहा है’, ‘डाल पर बैठा है’ विधेय हैं क्योंकि अर्जुन ने, कुत्ता, तोता,-इन उद्देश्यों (कर्ताओं) के कार्यों के विषय में क्रमशः मारा, भौंक रहा है, बैठा है, ये विधान किए गए हैं, अतः इन्हें विधेय कहते हैं।
◾️वाक्य का वर्गीकरण
वाक्य का वर्गीकरण प्रमुखतः तीन आधारों पर किया जाता है –
◾️क्रिया के आधार पर
◾️रचना के आधार पर
◾️अर्थ के आधार पर
1. रचना के अनुसार वाक्य के भेद
इस आधार पर वाक्य के तीन प्रकार माने जाते है –
✔️साधारण वाक्य।
✔️संयुक्त वाक्य।
✔️मिश्रित वाक्य।
1. साधारण वाक्य :- जिस वाक्य में केवल एक ही उद्देश्य (कर्ता) और एक ही समापिका क्रिया हो, वह साधारण वाक्य कहलाता है।
✍जैसे :-
बच्चा दूध पीता है।
कमल गेंद से खेलता है।
मृदुला पुस्तक पढ़ रही हैं।
नोट:- इसमें कर्ता के साथ उसके विस्तारक विशेषण और क्रिया के साथ विस्तारक सहित कर्म एवं क्रिया-विशेषण आ सकते हैं।
✍जैसे :- अच्छा बच्चा मीठा दूध अच्छी तरह पीता है। यह भी साधारण वाक्य है।
2. संयुक्त वाक्य :- जब किसी वाक्य में दो साधारण वाक्य अथवा दो मिश्र वाक्य किसी एक योजक शब्द (और, एवं, तथा, या, व, अथवा, अपितु, बल्कि, लेकिन, किन्तु, परन्तु इत्यादि) से जुड़े हुए हो तो वह संयुक्त वाक्य कहलाता है। ये चार प्रकार के होते हैं।
(1) संयोजक :- जब एक साधारण वाक्य दूसरे साधारण या मिश्रित वाक्य से संयोजक अव्यय द्वारा जुड़ा होता है।
जैसे :- गीता गई और सीता आई।
(2) विभाजक :- जब साधारण अथवा मिश्र वाक्यों का परस्पर भेद या विरोध का संबंध रहता है।
जैसे :- वह मेहनत तो बहुत करता है पर फल नहीं मिलता।
(3) विकल्पसूचक :- जब दो बातों में से किसी एक को स्वीकार करना होता है।
जैसे :- या तो उसे मैं अखाड़े में पछाड़ूँगा या अखाड़े में उतरना ही छोड़ दूँगा।
(4) परिणामबोधक :- जब एक साधारण वाक्य दसूरे साधारण या मिश्रित वाक्य का परिणाम होता है।
जैसे :- आज मुझे बहुत काम है इसलिए मैं तुम्हारे पास नहीं आ सकूँगा।
3. मिश्रित वाक्य :- जब किसी वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य एवं एक या अधिक उपवाक्य होते है तो वह मिश्र वाक्य कहलाता है।
» पहचान के लिए जब किसी वाक्य में योजक शब्द के रूप में शब्दों (जब-तब, जैसा-वैसा, जितना-उतना, जिसकी-उसकी, यदि-तो, यद्यपि-तथापि इत्यादि) का प्रयोग हो रहा हो तो वह मिश्र वाक्य माना जाता है जैसे –
गांधीजी ने कहा की सदा सत्य बोलो |
यदि वह घर आएगा तो मैं उससे अवश्य मिलूँगा |
आश्रित वाक्य तीन प्रकार के होते हैं :-
✔️संज्ञा उपवाक्य।
✔️विशेषण उपवाक्य।
✔️क्रिया-विशेषण उपवाक्य।
1. संज्ञा उपवाक्य :- जब आश्रित उपवाक्य किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम के स्थान पर आता है तब वह संज्ञा उपवाक्य कहलाता है।
जैसे :- वह चाहता है कि मैं यहाँ कभी न आऊँ। यहाँ कि मैं कभी न आऊँ, यह संज्ञा उपवाक्य है।
2. विशेषण उपवाक्य :- जो आश्रित उपवाक्य मुख्य उपवाक्य की संज्ञा शब्द अथवा सर्वनाम शब्द की विशेषता बतलाता है वह विशेषण उपवाक्य कहलाता है।
जैसे :- जो घड़ी मेज पर रखी है वह मुझे पुरस्कारस्वरूप मिली है। यहाँ जो घड़ी मेज पर रखी है यह विशेषण उपवाक्य है।
3. क्रिया – विशेषण उपवाक्य :- जब आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की क्रिया की विशेषता बतलाता है तब वह क्रिया-विशेषण उपवाक्य कहलाता है।
✔️जैसे :- जब वह मेरे पास आया तब मैं सो रहा था। यहाँ पर जब वह मेरे पास आया यह क्रिया-विशेषण उपवाक्य है।
2. अर्थ के अनुसार वाक्य के प्रकार
इस आधार पर वाक्य 8 प्रकार के माने जाते है
विधानार्थक वाक्य।
निषेधार्थक वाक्य।
आज्ञार्थक वाक्य।
प्रश्नार्थक वाक्य।
इच्छार्थक वाक्य।
संदेर्थक वाक्य।
संकेतार्थक वाक्य।
विस्मयबोधक वाक्य।
1. विधानार्थक वाक्य :- जिन वाक्यों में क्रिया के करने या होने का सामान्य कथन हो।
जैसे :- मैं कल दिल्ली जाऊँगा। पृथ्वी गोल है।
2. निषेधार्थक वाक्य :- जिस वाक्य से किसी बात के न होने का बोध हो।
जैसे :- मैं किसी से लड़ाई मोल नहीं लेना चाहता।
3. आज्ञार्थक वाक्य :- जिस वाक्य से आज्ञा उपदेश अथवा आदेश देने का बोध हो।
जैसे :- शीघ्र जाओ वरना गाड़ी छूट जाएगी। आप जा सकते हैं।
4. प्रश्नार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में प्रश्न किया जाए।
जैसे :- वह कौन हैं उसका नाम क्या है।
5. इच्छार्थक वाक्य :- जिस वाक्य से इच्छा या आशा के भाव का बोध हो।
जैसे :- दीर्घायु हो। धनवान हो।
6. संदेहार्थक वाक्य :- जिस वाक्य से संदेह का बोध हो।
जैसे :- शायद आज वर्षा हो। अब तक पिताजी जा चुके होंगे।
7. संकेतार्थक वाक्य :- जिस वाक्य से संकेत का बोध हो।
जैसे :- यदि तुम कन्याकुमारी चलो तो मैं भी चलूँ।
8. विस्मयबोधक वाक्य :- जिस वाक्य से विस्मय के भाव प्रकट हों।
जैसे :- अहा ! कैसा सुहावना मौसम है।
3. क्रिया के आधार पर
इस आधार पर वाक्य को वाच्य के नाम से पुकारा जाता है एवं वाच्य तीन प्रकार के माने जाते है –
कर्तृ वाच्य
कर्म वाच्य
भाव वाच्य
1. कर्तृ वाच्य :- जब किसी वाक्य में कर्ता के लिंग/वचन/पुरुष के अनुसार क्रिया प्रयुक्त होती है अर्थात कर्ता का लिंग/वचन/पुरुष बदल देने से यदि क्रिया भी बदल दी जाती है तो वह कर्तृवाच्य कहलाता है जैसे –
राम पुस्तक पढ़ता है
सीता पुस्तक पढ़ती है
बच्चे पुस्तक पढ़ते है
2. कर्म वाच्य :- जब किसी वाक्य में कर्म के लिंग/ वचन/ पुरुष के अनुसार क्रिया प्रयुक्त होती है अर्थात कर्म का लिंग/वचन/पुरुष बदलते ही यदि क्रिया भी बदल जाती है तो वह कर्म वाच्य कहलाता है जैसे –
राम के द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है
राम के द्वारा अनेक पुस्तक पढ़ी जाती है
राम के द्वारा अनेक अखबार पढे जाते है
3. भाववाच्य :- जब किसी वाक्य में क्रिया न तो कर्ता के लिंग/वचन/पुरुष के अनुसार बदलती है एवं न ही कर्म के लिंग/वचन/पुरुष के अनुसार बदलती है अपितु किसी भी भाव विशेष के अनुसार सदैव अन्य पुरुष, पुलिंग, एकवचन की क्रिया का प्रयोग होता है तो वहाँ भाववाच्य माना जाता है|
» पहचान के लिए यदि किसी वाक्य में कर्ता के साथ ‘से’ परसर्ग लिखा हुआ हो एवं अकर्मक क्रिया प्रयुक्त हो रही हो तो वह भाववाच्य माना जाता है जैसे –
राम से दौड़ा नहीं गया
उससे हंसा नहीं जा रहा था
चिड़िया से उड़ा नहीं जाएगा
◾️ वाक्य – परिवर्तन
» वाक्य के अर्थ में किसी तरह का परिवर्तन किए बिना उसे एक प्रकार के वाक्य से दूसरे प्रकार के वाक्य में परिवर्तन करना वाक्य – परिवर्तन कहलाता है।
(1) साधारण वाक्यों का संयुक्त वाक्यों में परिवर्तन
साधारण वाक्य – संयुक्त वाक्य
1. मैं दूध पीकर सो गया। – मैंने दूध पिया और सो गया।
2. वह पढ़ने के अलावा अखबार भी बेचता है। – वह पढ़ता भी है और अखबार भी बेचता है
3. मैंने घर पहुँचकर सब बच्चों को खेलते हुए देखा। – मैंने घर पहुँचकर देखा कि सब बच्चे खेल रहे थे।
4. स्वास्थ्य ठीक न होने से मैं काशी नहीं जा सका। – मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं था इसलिए मैं काशी नहीं जा सका।
5. सवेरे तेज वर्षा होने के कारण मैं दफ्तर देर से पहुँचा। – सवेरे तेज वर्षा हो रही थी इसलिए मैं दफ्तर देर से पहुँचा।
(2) संयुक्त वाक्यों का साधारण वाक्यों में परिवर्तन
संयुक्त वाक्य – साधारण वाक्य
1. पिताजी अस्वस्थ हैं इसलिए मुझे जाना ही पड़ेगा। – पिताजी के अस्वस्थ होने के कारण मुझे जाना ही पड़ेगा।
2. उसने कहा और मैं मान गया। – उसके कहने से मैं मान गया।
3. वह केवल उपन्यासकार ही नहीं अपितु अच्छा वक्ता भी है। – वह उपन्यासकार के अतिरिक्त अच्छा वक्ता भी है।
4. लू चल रही थी इसलिए मैं घर से बाहर नहीं निकल सका। – लू चलने के कारण मैं घर से बाहर नहीं निकल सका।
5. गार्ड ने सीटी दी और ट्रेन चल पड़ी। – गार्ड के सीटी देने पर ट्रेन चल पड़ी।
(3) साधारण वाक्यों का मिश्रित वाक्यों में परिवर्तन
साधारण वाक्य – मिश्रित वाक्य
1. हरसिंगार को देखते ही मुझे गीता की याद आ जाती है। – जब मैं हरसिंगार की ओर देखता हूँ तब मुझे गीता की याद आ जाती है।
2. राष्ट्र के लिए मर मिटने वाला व्यक्ति सच्चा राष्ट्रभक्त है। – वह व्यक्ति सच्चा राष्ट्रभक्त है जो राष्ट्र के लिए मर मिटे।
3. पैसे के बिना इंसान कुछ नहीं कर सकता। – यदि इंसान के पास पैसा नहीं है तो वह कुछ नहीं कर सकता।
4. आधी रात होते-होते मैंने काम करना बंद कर दिया। – ज्योंही आधी रात हुई त्योंही मैंने काम करना बंद कर दिया।
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प्रश्न - अमीन किसे कहते है ?
उत्तर - अमीन एक अरबी शब्द है । अमीन को ईमानदार या सत्यवादी कहते है । ऐसा व्यक्ति जो नक्शा नापता है, जमीन नापता है, सर्वे संबंधी ज्ञान रखता है । चकबंदी संबंधी ज्ञान रखता है । अपने आस-पास के गाँव में काम करता हो । और कभी भी धूप से भागते नही हो । और जमीन मालिक से आराम से बात करे । जमीन मालिक को उसके जमीन से जुड़े मसलो पर जमीन मालिक को संतुष्ठ कर सके । और कभी भी ऐसी बात न बोले कि झगड़ा हो या किसी को तकलीफ हो । और कभी भी अपने काम से भागे नही या किसी को मेहनत के लिए नही न कहे । इसके बाबजूद भी जो अपने मेहनत और ईमानदारी से अपना काम करे उसे अमीन कहते है ।
सर्वे संबंधी औजार रखता है जैसे -
(1) - गुनिया
(2) - प्रकाल
(3) - टॉक
(4) - जरीब रेक्टेनगल
(5) - डायगोनल
(6) - 0.1 कलम
(7) - पेंसिल
(8) - Trash paper
प्राचीन काल में अमीन पर पूर्ण विशवास करते थे । परंतु आजकल अमीन शब्द सुनते ही लोग कभी भी विश्वास करने को तैयार नही होते । अमीन लोग ईमानदार और सत्यवादी होते है ।
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