✅ कुछ नए और उपयोगी तथ्य जो गाइडों में नहीं मिलेंगे।✅

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🔲 दस शील / सूत्र : विजयदेवनारायण साही

 

🥭पहला शीलः मैं बहुत अक्लमंद हूं। मुझ जैसे और भी हैं। बहुत-से ऐसे हैं जो न मुझे जैसे हैं, न मुझ-जैसों जैसे हैं। इसको छिपाने से कोई लाभ नहीं है, न छिपाने से कोई हानि नहीं है; छिपाने से हानि है, न छिपाने से लाभ है।


🍏दूसरा शीलः मैं परम स्वतंत्र हूं। मेरे सिर पर कोई नहीं है। अर्थात् अपने किए के लिए मैं शत-प्रतिशत जिम्मेदार हूं। अर्थात् मेरे लिए नैतिक होना संभव है।


🌽तीसरा शीलः मैं संसार का सबसे महत्त्वपूर्ण प्राणी हूं। यदि नहीं हूं तो आत्म-हत्या के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं है। यही दशा आपकी भी है।


🥦 चौथा शीलः नितांत अव्यावहारिक होना नितांत ईमानदारी और अक्लमंदी का लक्षण है। समाज में सब तो नहीं, पर काफी लोग ऐसे होने चाहिए। जिस समाज में नितांत अव्यावहारिक कोई नहीं रह जाता, वह समाज रसातल को चला जाता है।


🥝पांचवां शीलः मैं अपने को बहुत नहीं सेटता, क्योंकि यह मेरा कर्त्तव्य नहीं है। लेकिन आपका कर्त्तव्य है कि मुझे सेटें। इसका प्रतिलोम भी सत्य है।


🍑छठा शीलः सर्वोत्तम समाज वह है जिसमें व्यक्ति के केवल अधिकार ही अधिकार हों, कर्त्तव्य कोई नहीं। अर्थात् जो भी मैं चाहूं वह मुझे मिल जाय, लेकिन जो मैं देना न चाहूं वह मुझे देना न पड़े।


🍊सातवां शीलः कविता के क्षेत्र में केवल एक आर्य-सत्य हैः दुःख है। शेष तीन राजनीति के भीतर आते हैं।


🍇आठवां शीलः कविता को राजनीति में नहीं घुसना चाहिए। क्योंकि इससे कविता का तो कुछ नहीं बिगड़ेगा, राजनीति के अनिष्ट की संभावना है।


🥬नवां शीलः शेली महान् क्रांतिकारी कवि था, इसलिए उसको चाहता हूं; लेकिन उसके नेतृत्व में क्रांतिकारी होना नहीं चाहता। बाबा तुलसीदास महान् संत कवि थे, लेकिन वह संसद के चुनाव में खड़े हों तो उन्हें वोट नहीं दूंगा। नीत्शे का ‘जरदुस्त्र उवाच’ सामाजिक यथार्थ की दृष्टि से जला देने लायक है, पर कविता की दृष्टि से महान् कृतियों में से एक है। उसकी एक प्रति पास रखता हूं और आपसे भी सिफारिश करता हूं।


🥭दसवां शीलः कवि अनिर्वाचित मंत्रदाता हो सकता है। निर्वाचित मंत्री हो जाने से कवि का हित और जनता का अहित होने की आशंका है। दोनों ही अवांछनीय संभावनाएं हैं |


Hindi Sahitya Most Important

◾️नाटक में कार्यावस्था एवम अर्थप्रकृति को मिलाने वाला तत्व संधि है। संधियों के 5 प्रकार हैं - मुख, प्रतिमुख, गर्भ, विमर्श, निर्वहण


◾️"जहां तुमने लिखा है प्यार/वहीं लिख दो सड़क/फर्क नहीं पड़ता। मेरे युग का मुहावरा है/फ़र्क नहीं पड़ता" कविता की पंक्ति किसकी है- केदारनाथ सिंह


◾️"कविता में मैं सबसे अधिक ध्यान देता हूँ बिम्ब विधान पर" - केदारनाथ सिंह


◾️मार्क्सवादी साहित्य चिंतन : इतिहास तथा सिद्धांत पुस्तक डॉ.शिवकुमार मिश्र की है।


◾️साधारणीकरण का सर्वप्रथम प्रयोग भट्टनायक ने किया। 


◾️सानेट 14 पंक्तियों में सीमित गीतिकाव्य है। जिसका जन्म इटली में हुआ।


◾️सुरति-निरति सन्त साहित्य के प्रचलित पारिभाषिक शब्द हैं। जिनका अर्थ स्मृति-वैराग्यवृत्ति से लगाया जाता है।


◾️सूफी साधकों की चार अवस्थाएं मानी जाती हैं - शरीयत, तरीकत, हकीकत, मारिफ़त


◾️पुस्तक नारी का मुक्ति संघर्ष - डॉ अमरनाथ एवम स्त्री संघर्ष का इतिहास - राधा कुमार


◾️रामविलास शर्मा ने आधुनिक जातियों के निर्माण के लिए निम्न 4 तत्व माने हैं - सामान्य भाषा, सामान्य प्रदेश, सामान्य आर्थिक जीवन, सामान्य संस्कृति


◾️"भारतेंदु से जो नवजागरण शुरू होता है वह नई परिस्थितियों में पुराने लोकजागरण का ही विकास है" - रामविलास शर्मा


◾️रस्साकशी वीरभारत तलवार की रचना है। जो कि नवजागरण पर केंद्रित है।


◾️राहुल जी का लघु उपन्यास 'कनैला की कथा' व्यक्ति केंद्रित न होकर स्थान केंद्रित है।


◾️"जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञानदशा कहलाती है, उसी प्रकार हृदय की मुक्तावस्था रसदशा कहलाती है"। - आचार्य रामचंद्र शुक्ल

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